Chaar Ladkiyu Ki Chudai Ke Maje -चार लड़कियों के चुदाई के मजे- 1

Chaar Ladkiyu Ki Chudai Ke Maje -चार लड़कियों के चुदाई के मजे- 1

मेरा नाम गबरू है. मेरी उम्र लगभग 45 वर्ष की है. यूँ तो मै एक टैक्सी ड्राइवर हूँ लेकिन मै रंडियों का दलाल भी हूँ. मैंने अपने संपर्क से कई बेरोजगार लड़कियों को जिस्म फरोशी के धंधे में उतारा. Chaar Ladkiyu Ki Chudai

मैंने कभी भी किसी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में आने को मजबूर नहीं किया. मैंने सिर्फ उन लड़कियों को कमाने का एक जरिया दिखाया एवं सुविधाएं दिलवाईं जिन के पास खाने के भी लाले थे. मै भी उन लड़कियों को बारी बारी से चोदता हूँ. मेरे लिए मेरी सभी लड़कियों का जिस्म फ्री में उपलब्द्ध रहता है. क्यों की मैं ही उन्हें नए नए क्लाइंट खोज के ला कर देता हूँ. टैक्सी की ड्राइवरी से मुझे नए ग्राहक खोजने में ज्यादा परेशानी नही होती है.

रागीनी इन्ही मजबूर लड़कियों में एक थी. जिसकी उम्र सिर्फ 19 साल की है जो अब पेशेवर रंडी बन चुकी थी. वो तीन साल पहले इस धंधे में मेरे द्वारा ही लायी गयी थी. हालांकि वो मुझे अंकल कहती है लेकिन मै भी उसके जिस्म का भोग उठाता हूँ. मुझे उसे चोदने में काफी आनंद आता था . अचानक एक दिन उसके गाँव से उसकी मौसी का फ़ोन आया कि उसके पति (यानि रागिनी के मौसा) का देहांत हो गया है. और वो लोग काफी मुश्किल में हैं. वो भी अपनी बेटी को रागिनी के साथ उसके धंधे में देना चाहती है ताकि घर का खर्च चल सके. रागिनी ने मुझे सारी बातें बतायी. रागिनी ने अपने धंधे के बारे में अपने मौसी को काफी पहले ही बता दिया था जब दो साल पहले उसकी मौसी अपने पति का इलाज करवाने रागिनी के यहाँ आयी थी. Chaar Ladkiyu Ki Chudai

रागिनी ने अपनी मौसी की समस्या के बारे में मुझे बताया और कहा कि मौसी भी अपनी बेटी को रंडीबाजी के धंधे में उतारना चाहती है. मै झट से उसे अपने गाँव जा कर उस लड़की को लेते आने कहा.
रागिनी ने कहा – गबरू अंकल, आप भी चलिए ना मेरे साथ. एकदम मस्त जगह है मेरा गाँव . पहाड़ों पर है. अगर आप मेरे साथ चलेंगे तो हम दोनो का हनीमून भी हो जाएगा .
मैंने कहा – हाँ क्यों नहीं.

और हम दोनों ने उसी शाम रागिनी के अल्मोड़ा के लिए बस पकड़ ली अगली सुबह करीब 9 बजे हम दोनों अल्मोड़ा पहुँच गए. वहीँ बस-स्टौप पर हीं फ़्रेश हो कर हम दोनों ने वहीं नास्ता किया और फ़िर करीब दो घन्टे हमारे पास थे, क्योंकि उसकी गाँव जाने वाली बस करीब 1 बजे खुलती। हम दोनों पास के एक पार्क में चले गए। रागिनी ने अपनी सब आपबीती बताई। उसकी मौसी बहुत गरीब हैं, और मौसा मजदूरी करते थे। उनकी मौत के बाद परिवार दाने-दाने का मोहताज है। रागिनी कभी-कभार पैसा मनी-आर्डर कर देती थी। अब मौसी ने उसको अपनी मदद और सलाह के लिए बुलाया था।

मौसी की तीन बेटियाँ थीं – 13, 15 और 17 साल की। मौसी गाँव के चौधरी के घर काम करती थी तो रोटी का जुगार हो जाता था। चौधरी उसकी मौसी को कभी-कभार साथ में सुलाता भी था। उसके मौसा भी उसके खेत में हीं काम करते थे। यह सब बहुत दिन से चल रहा था। मौसा के मरने के बाद चौधरी अब उसकी मौसी के घर पर भी आ कर रात गुजारने लगा था. चौधरी के अलावे उसका मुंशी भी उसकी मौसी के यहाँ रात गुजारने आ जाता था और उसकी जिस्म का मज़ा लेता था.  Chaar Ladkiyu Ki Chudai

अब चौधरी रागिनी की मौसी पर दवाब बना रहा था कि वो बड़ी बेटी रीना को उसके साथ सुलावे तभी वो उनको काम पर रखेगा। मौसी नहीं चाहती थी कि उनकी बेटी उसी से चुदे जो उसकी माँ भी चोदा हो, और कोई फायदा भी ना हो. सो वो रागिनी को बुलाई थी कि वो उसको साथ ले जा कर पूरी तरह से रंडी के काम पर लगा दे जिससे कमाई होने लगे।

मैं अब पहली बार रागिनी से उसके घर के बारे में पूछा तो वो बोली, “अब तो सिर्फ़ मौसी हीं हैं. छः महिने हुए माँ कैंसर से मर गई। मेरे बाप ने मुझे और उनको पहले हीं निकाल दिया था, क्योंकि माँ की बीमारी लाईलाज थी और उसमें वो पैसा नहीं खर्च करना चाहते थे। मेरे रिश्तेदारों ने हम दोनों से कोई खास संपर्क नहीं रखा, और मेरी माँ भी यहीं अल्मोड़ा में हीं मरी।” आज पहली बार रागिनी के बारे में जान कर मुझे सच में दुख हुआ। मेरे चेहरे से रागिनी को भी मेरे दुख का आभास हुआ सो वो मूड बदलने के लिए बोली, “अब छोड़िए भी यह सब अंकल, और बताईए, मेरे साथ हनीमून आज कैसे मनाईएगा?” Chaar Ladkiyu Ki Chudai

 

मैंने भी अपना मूड बदला, “अब हनीमून तो मुझे एक हीं तरह से मनाने आता है, लन्ड को बूर में पेल कर हिला हिला कर लड़की चोद दी, हो गया अपना हनीमून।”

रागिनी बोली, “अंकल, आप एक बार मेरी मौसी को चोद कर उनको कुछ पैसे दे दीजिए न। चौधरी तो फ़्री में उनको चोदता रहा है।”

मैं आश्चर्य से उसको देखा, “तुम्हें पता है कि तुम क्या कह रही हो? जवान रीना को क्यों न चोदूँ जो उसकी बुढ़िया माँ को चोदूँ?”

रागिनी हँसी, “पक्के हरामी हैं आप अंकल सच में…अरे रीना तो साथ में चल रही है। मौसी वैसी नहीं है जैसी आप सोंच रहे हैं। 35 साल से भी कम उमर होगी। 16 साल की उमर में तो वो माँ बन गई थी। खुब छरहरे बदन की है, आपको पसन्द आएगी। मैंने उनको समझा दिया है कि मैं अपने अंकल को बुला रही हूँ, अगर खुब अच्छे से उनका खातिर हुआ तो वो रीना को जल्दी नौकरी लगवा देंगे।”

मैंने भी सोचा कि क्या हर्ज है, आराम से यहाँ माँ चोद लेता हूँ, फ़िर लौट कर बेटी की सील तोड़ूँगा। और फ़िर इस माँ को चोदने का एक और फ़ायदा था कि यहाँ एक के बाद एक करके तीन सीलबन्द बूर अगर भगवान ने मदद की तो मुझे खुलने को मिल जाने वाली थी। मैंने भी सोंच लिया कि इस मौसी को तो ऐसे चोदना है कि वो आज तक की सारी चुदाई भूल कर बस मेरी चुदाई हीं याद रखे।

दिन में हल्का से एक बार और नास्ता जैसा हीं खा कर हम दोनों बस में बैठ कर गाँव की तरफ़ चल दिए।करीब 6.30 बजे हम जब रागिनी के मौसी के घर पहुँचे तो पहाड़ों में रात उतरने लगी थी। हल्के अंधेरे और लालटेन की रौशनी में हमारा परिचय हुआ। रागिनी ने मुझे अपनी मौसी बिन्दा और उनकी तीनों बेटियों रीना, रूबी और मीता से मिलाया। दो कमरे का छॊटा सा घर था वो। मेरे लिए चिकेन और रोटी बना हुआ था। कुछ देर इधर-उधर की बातों के बाद हमने खाना खाया। Chaar Ladkiyu Ki Chudai

रागिनी ने मौसी से कहा, “आज मैं अंकल के साथ हीं सो जाती हूँ, तुम लोग दूसरे कमरे में सो जाना।”

सबसे छॊटी बेटी मीता ने कहा, “हम आपके पैर दबा दें अंकल?”
मौसी बोली, “नहीं बेटी, दीदी है न… वो अंकल को आराम से सुला देगी। तुम चिन्ता मत करो। ले जाओ रागिनी अपने अंकल को…आराम दो उनको. थके होंगे।”

रागिनी मेरे साथ एक कमरे में चल दी। अन्दर जाते ही हम दोनों निवस्त्र हो गए. उस रात रागिनी ने मुझे कुछ करने नहीं दिया। आराम से मुझे लिटा दी और खुद हीं मेरा लन्ड चूसी, उसको खड़ा की। फ़िर मेरे उपर चढ़ कर अपने चूत में मेरा लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर घुसाई और फ़िर उपर से खुब हुमच हुमच कर चोदी। जल्दी हीं वो भी गर्म हो गई और आह आह आह, उउह उउह उउउह करने लगी। बिना इस चिन्ता के कि बाहर अभी सब जगे हुए हैं और उसके मुँह से निकल रही आवाज वो सब सुन रहे होंगे, उसने मेरे लन्ड पर अपनी चूत को खुव नचाया, इतना कि अब तो फ़च फ़च फ़च…की आवाज होने लगी थी। वो हाँफ़ रही थी…आआह आआह आआह और मैं भी हूम्म्म हूम्म्म्म हूऊम कर रहा था। करीब 15 मिनट की हचहच फ़चफ़च के बाद मेरे भीतर का लावा छूटा…आआआअह्ह्ह और मैंने अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। रागिनी ने भी उसी समय अपना पानी छोड़ा। और फ़िर अपने सलवार से अपना चूत पोछते हुए मेरे ऊपर से उतर गई। मुझे प्यास लग गयी थी. मैंने रागिनी को पानी लाने को कहा . उसने कमरे से ही अपनी मौसी को पानी के लिए आवाज़ लगाई. और अपने आप को एवं मुझे एक चादर से ढँक लिया. उसकी मौसी बिंदा तुरंत ही पानी ले कर आयी और नजरें झुकाए खुकाए हम दोनों की अर्द्धनंगी हालत को देखते हुए पानी का जग टेबल पर रख चली गयी. मैंने तीन गिलास पानी पीया. मैं सच में थक गया था, सो करवट बदल कर सो गया।

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अगले दिन खाना खाने के बाद करीब 12 बजे रागिनी और उसकी मौसेरी बहनें मुझे आस-पास की पहाड़ी पर घुमाने ले गई। हिमालय अपने सुन्दर लहजे में अपना सारा सौन्दर्य बिखेरे था।

एकांत देख कर रागिनी ने मुझे बता दिया कि आज रात में बिन्दा मेरे साथ सोएगी, मुझे उसको चोद कर सब सेट कर लेना है, वैसे वो सब पहले से सेट कर चुकी थी। करीब 5 बजे हम घर लौटे, तो उसकी मौसी बिन्दा हम सब के लिए खाना बना चुकी थी। खाना-वाना खाने के बाद हम सब पास में बैठ कर इधर-उधर की गप्पें करने लगे। पहाड़ी गाँव में लोग जल्दी सो जाते थे सो करीब आठ बजे तक पूरा सन्नाटा हो गया, तो रागिनी बोली, “मौसी, अंकल थक गए होंगे सो तुम उनके पैरों में थोड़ा तेल मालिश कर देना, मैं रीना के साथ उसके बिस्तर पर सो जाऊँगी।” इशारा साफ़ था कि आज मुझे बिन्दा को चोदना था।

बिन्दा मुझे देख कर मुस्कुराई और तेल की डिब्बी ले कर मुझे कमरे में चलने का इशारा की। पाँच चूतवालियों से घिरा मैं अपने किस्मत को सराहता हुआ बिन्दा के पीछे चल दिया और फ़िर कमरे के किवाड़ को खुला ही रहने दिया तथा सिर्फ उसके परदे फैला दिए. उस कमरे के बरामदे पर ही चारपायी पर उसकी सभी बेटियां और रागिनी लेटी हुई थी. बिन्दा तब तक अपने बदन से साड़ी उतार चुकी थी और भूरे रंग के साया और सफ़ेद ब्लाऊज में मेरा इंतजार कर रही थी। मैं उसे देख कर मुस्कुराया और अपने कपड़े खोलने लगा। वो मुझे देख रही थी और मैं अपने सब कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया। मेरा लन्ड अभी ढ़ीला था पर अभी भी उसका आकार करीब 6″ था। बिन्दा की नजर मेरे लटके हुए लन्ड पर अटकी हुई थी।

मैंने उसके चेहरे को देखते हुए, अपने हाथ से अपना लन्ड हिलाते हुए जोर से कहा, “फ़िक्र मत करो, अभी तैयार हो जाएगा…आओ चूसो इसको।”

मेरे हिलाने से मेरे लन्ड में तनाव आना शुरु हो गया था और मेरा सुपाड़ा अब अपनी झलक दिखाने लगा था। बिन्दा ने आगे बढ़ कर बिना किसी हिचक या शर्मिंदगी के मेरे लन्ड को अपने हाथों में पकड़ा और सहलाई। मादा के हाथ में जादू होता है, सो मेरा लन्ड बिन्दा के हाथ के स्पर्श से हीं अपना आकार ले लिया।बिन्दा ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर लन्ड अपने मुँह में भर लिया।
5-8 बार अंदर-बाहर करके बिन्दा बोली- आप सीधा आराम से लेटिए, मैं तेल लगा देती हूँ।

मैंने उसे बाहों में भर कर अपने ऊपर खींच लिया और बोला, “कोई परेशानी की बात नहीं है। मेरी सब थकान खत्म हो जाएगी जब तुम्हारी जैसी मस्त माल की चूत मेरे लन्ड की मालिश करेगी।” मुझे पता था की हम दोनों की एक – एक आवाज खुले किवाड़ के द्वारा उन बेटियों के काम में स्पष्ट सुनाई पड़ रहे होंगे.

मैंने बिन्दा के होठों से अपने होठ सटा दिए और वो भी चुमने में मुझे सहयोग करने लगी। मैंने उसके ब्लाऊज और पेटीकोट खोल दिए तो उसने खुद से अपने को उन कपड़ों से आजाद कर लिया।

मैंने बिन्दा को अपने से थोड़ा अलग करते हुए कहा, “देखूँ तो कैसी दिखती है मेरी जान…”।

बिन्दा मेरे इस अंदाज पर फ़िदा हो गई, उसके गाल लाल हो गए। बिन्दा अपने उमर से करीब 5 साल छोटी दिख रही थी दुबली होने की वजह से। वैसे भी उसकी उमर 35 के करीब थी। रंग साफ़ था, चुचियाँ थोड़ी लटकी थीं, पर साईज में छॊटी होने की वजह से मस्त दिख रही थीं। सपाट पेट, गहरी नाभी और उसके नीचे कालें घने झाँटों से घिरी चूत की गुलाबी फ़ाँक। काँख में भी उसको खुब सारे बाल थे। मैंने धीरे-धीरे उसके पूरे बदन पर हाथ घुमाने शुरु किए और उसमें गर्मी आने लगी। जल्द हीं उसका बदन चुदास से भर गया और तब मैंने उसकी चूचियों और चूत पर हमला बोल दिया, अपने हाथों और मुँह से। उसकी सिसकी पूरे कमरे में गुजने लगी। करीब आधा घन्टा में वो बेदम हो गई तो मैंने उसको सीधा लिटा कर उसके पैरों को फ़ैला कर ऊपर उठा दिया और बिना कोई भूमिका बाँधे, एक हीं धक्के में अपने लन्ड को पूरा उसकी चूत में घुसा दिया।

मुझे पता था कि मेरा लन्ड उसकी झाँटॊं को भी भीतर दबा रहा है। मैं चाहता भी यही था, सो मैंने लन्ड को कुछ इस तरह से आगे-पीछे करके घुसाया कि ज्यादा से ज्यादा झाँट मेरे लन्ड से दबे और वो झाँटों के खींचने से दर्द महसूस करे।
वही हुआ भी…बिन्दा तो चीख हीं उठी थी, “ओह्ह्ह्ह्ह्ह मेरा बाल खींच रहा है साहब जी”।

मैंने भी कहा, “तो मैं क्या करूँ, तुम्हारा झाँट हीं ऐसा शानदार है कि मत पूछो,”
वो अब अपना हाथ अपनी चुद रही चूत के आस-पास घुमा कर अपने झाँटों को मेरे लन्ड से थोड़ा दूर की, और फ़िर बोली, “हाँ अब चोदिए, खुब चोदिए मुझे…..आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह”।

मैंने अब उसकी जबर्दस्त चुदाई शुरु कर दी थी। वो भी गाँड़ उछाल-उछाल कर ताल मिला रही थी और मैं तो उसकी चुचियों को जोर-जोर से मसल मसल कर चुदाई किए जा रहा था। ये सोच कर की बाहर उसकी बेटियाँ अपनी माँ की चुदाई की आवाज सुन रही हैं मेरा लन्ड और टनटना गया था और जोरदार धक्के लगा रहा था। वो झड़ गई थी, थोड़ा शान्त हुई थी, पर मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने उसको पलटा और जब तक वो कुछ समझे मैंने पीछे से उसके चूत में लन्ड पेल दिया। वो थक कर निढ़ाल हो गई थी तो मैं झड़ा उसकी चूत के भीतर। पर मेरा लन्ड कब एक बार झड़ने से शान्त हुआ है जो आज होता।

मैंने बिन्दा से कहा, कि वो अब आराम से पोजीशन ले ले, मैं उसकी गाँड़ मारुँगा। वो शाय्द थकान की वजह से ऐसा चाह नहीं रही थी, पर मैंने उसको तकिया पकड़ा दिया तो वो समझ गई में नहीं रुकने वाला। सो वो भी तकिये पर सिर टिका कर अपने घुटने थोड़ा फ़ैला हर सही से बिस्तर पर पलट गई। मैं उसके पीछे थोड़ा खड़ा हो गया और फ़िर उसकी गाँड़ पर ढ़ेर सारा थुक लगा कर अपना लन्ड छेद से भिड़ा दिया। लेकिन वो जोर से कराह उठी.

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बोली – आह..रुकिए साहब जी आपका लंड बहुत मोटा है. मेरी गांड में वेसलिन लगा दीजिये तब मेरी गांड मारिये.
मैंने कहा – कहाँ है वेसलिन?

उसने आलमारी में से वेसलिन निकाल मुझे दिया. मैंने ढेर साड़ी वेसलिन उसके गांड के छेद में डाला फिर अपना लंड उसके गांड में घुसाया. थोड़ी मेहनत करनी पड़ी, पर वो दर्द सह कर अपने गाँड़ में मेरा लन्ड घुसवा ली। मैं भी मस्त हो कर अब उसकी गाँड़ मारने लगा। शुरु में दर्द की वजह से वो कराह रही थी, पर जल्द हीं उसको भी मजा मिलने लगा और फ़िर आह्ह्ह्ह आअह्ह आअह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उउउम्म्म जैसे सेक्सी बोल कमरे में गुँजने लगे। इस बार थोड़ा थकान मुझे भी लगने लगा था, शायद दिन भर का घुमना अब हावी हो रहा था, सो मैं भी तेजी में धक्के पर धक्के लगाए और जल्द हीं बिन्दा की गाँड़ अपने लन्ड के रस से भर दिया। वो तो कब की थक कर निढ़ाल थी। अब हम दोनों में से कोई हिलने की हालत में नहीं था सो हम दोनों ऐसे हीं नंगे सो गए। बिन्दा ने तो अपने चूत और गाँड़ को साफ़ करना भी मुनासिब नहीं समझा।

अगली सुबह मैं जरा देर से तब उठा जब बिंदा मुझे चाय देने आयी. उस समय तक मै नंगा ही था. मैंने तौलिये को अपने कमर पर लपेटा .तब तक सब चाय पी चुके थे। मैं जब बाहर आया तो देखा कि खुब साफ़ और तेज धूप निकली हुई है। पहाड़ों में वैसे भी धूप की चमक कुछ ज्यादा होती है। रागिनी और उसकी मौसी आंगन में बैठ कर सब्जी काट रहे थे, बड़ी रीना सामने चौके में कुछ कर रही थी। रूबी नहा चुकी थी और वो धूले कपड़ों को सुखने के लिए तार पर डाल रही थी।  Chaar Ladkiyu Ki Chudai

आंगन के एक कोने में सबसे छोटी बहन मीता नहा रही थी। सब कपड़े उतार कर, बस एक जंघिया था उसके बदन पर। मुझे लग गया कि घर में कोई मर्द तो रहता नहीं था, सो इन्हें इस तरह खुली धूप में नहाने की आदत सी थी। मुश्किल यह थी कि मैं जोरों से पेशाब महसूस कर रहा था, और इसके लिए मुझे उसी तरह जाना होता जिधर मीता नहा रही थी। वो एक तरह से बाथरूम मे सामने हीं बैठी थी। तभी मौसी चौके की तरफ़ गई तो मैंने अपनी परेशानी रागिनी को बताई।

उसने कहा, “तो कोई बात नहीं, आप चले जाइए

बाथरूम में…”।मैं थोड़ा हिचक कर बोला-“पर मीता?”
अब वो मुस्कुराते हुए बोली, “आपको कब से लड़की से लज लगने लगा” और उसने आँख मार दी। मेरे लिए वैसे भी पेशाब को रोकना मुश्किल हो रहा था सो निकल गया। एक नजर मीता के बदन पर डाली और बाथरूम में पेशाब करने लगा। पेशाब करने के बाद मैं बाहर जहाँ मीता नहा रही थी वहाँ पहुँच गया, अपना हाथ-मुँह, चेहरा धोने। मीता भी समझ गई कि मैं हाथ-मुँह धोना चाह रहा हूँ। उसने बाल्टी-मग मेरी तरफ़ बढ़ा दिया और खुद अपने हाथों से अपना बदन रगड़ने लगी।Chaar Ladkiyu Ki Chudai

अपना चेहरा और हाथ-मुँह धोते हुए अब मैं मीता को घुरने लगा। खुब गोरी झक्क सफ़ेद चमड़ी, हल्का उभार ले रही छाती जिसका फ़ूला हुआ भाग मोटे तौर पर अभी भी चुचक हीं था, अभी मीता की छाती को चूची बनने में समय लगना था। पतली-पतली चिकनी टाँग पर सुनहरे रोंएँ। मेरी नजर बरबस हीं उसके टाँगों के बीच चली गई, पर वहाँ तो एक बैंगनी रंग का जांघिया था, ब्लूमर की तरह का जो असल चीज के साथ-साथ कुछ ज्यादा क्षेत्र को ढ़ंके हुए था। मेरे दिमाग में आया, “काश इस लड़की ने अभी जी-स्ट्रींग पहनी होती…” और तभी मीता अपने दोनों बाहों को उपर करके अपने गले के पीछे के हिस्से को रगड़ने लगी। इस तरह से उसकी छाती थोड़ी उपर खींच गई और तब मुझे लगा कि हाँ यह भी एक लड़की है, बच्ची नहीं रही अब।

इस तरह से हाथ ऊपर करने के बाद उसकी छाती थोड़ा फ़ूली और अपने आकार से बताने लगी कि अब वो चूची बनने लगी है। मेरी नजर उसकी काँख पर गड़ गई। वहाँ के रोंएँ अब बाल बनने लगे थे। बाएँ काँख में तो फ़िर भी कुछ रोंआँ हीं था, बस चार-पाँच हीं अभी काले बाल बने थे, पर दाहिने काँख में लगभग सब रोआँ काला बाल बन चुका था। Chaar Ladkiyu Ki Chudai

अब वहाँ काला बालों का एक गुच्छा बन गया था, पर अभी उसको ठीक से उनको मुरना और हल्का घुंघराला होना बाकी था, जैसा कि आम तौर पर जवान लड़कियों में होता है। मीता के काँख में निकले ऐसे बालों को देख कर मैं कल्पना करने लगा कि उसकी बूर पर किस तरह का और कैसा बाल होगा। अब तक वो भी अपना बदन रगड़ चुकी थी सो उसको बाल्टी कि जरूरत थी, और मेरे लिए भी अब वहाँ रूकने का कोई बहाना नहीं था।अब तक रीना दोबारा चाय बना चुकी थी, और दुबारा से सब लोग चाय ले कर बीच आंगन में बिछे चटाईओं पर बैठ गए थे।
रागिनी ने अब पूछा, “कब तक आपको छुट्टी है?”
मैंने पूछा, “क्यों…?”
तो वो बोली, “असल में रीना को तो हमलोग के साथ हीं चलना है तो उसको अपना सामान भी ठीक करना होगा न…दो-तीन दिन तो अभी है कि नहीं?”

मैंने कहा, “अभी तीसरा दिन है, और मैंने एक सप्ताह की छुट्टी ली हुई है, सो अभी तो समय है।”
अब बिन्दा (रागिनी की मौसी) बोली, “रीना कर तो लेगी यह सब तुम्हारा वाला काम….कहीं बेचारी को परेशानी तो न होगी?” रागिनी ने उनको भरोसा दिलाया, “तुम फ़िक्र मत करो मौसी, जब पैसा जिलने लगेगा तो सब करने लगेगी। मैं भी शुरु-शुरु में हिचकी थी। पहले एक-दो बार तो बहुत खराब लगा फ़िर अंकल से भेंट हुई और जिस प्यार और इज्जत के साथ अंकल ने मेरे साथ सेक्स किया कि फ़िर सारा डर चला गया और उसके बाद तो मैं इसी में रम गई। अंकल का साथ मुझे बहुत बल देता है, लगता है कि इस नए जगह में भी कोई अपना है। कल तुमने भी देखा न अंकल का सेक्स का अंदाज़? कोई तकलीफ हुई क्या तुझे? ”  Chaar Ladkiyu Ki Chudai

बिंदा ने थोडा मुस्कुरा कर अपना सर निचे झुकाया और कहा – नहीं री. तेरे अंकल तो सच में बहुत प्यार से सेक्स करते हैं.

मुझे अपने पर रागिनी का ऐसा भरोसा जान कर अच्छा लगा और उस पर खुब सारा प्यार आया, मेरे मुँह से बरबस निकल गया, “तुम हो हीं इतनी प्यारी बच्ची….” और मैंने उसका हाथ पकड़ कर चुम लिया।

रागिनी ने अब एक नई बात कह दी – “मौसी मेरे ख्याल से रीना को आज रात में अंकल के साथ सो लेने दो। अंकल इतने प्यार से इसको भी करेंगे कि उसका सारा भय निकल जाएगा।”

मुझे इस बात की उम्मीद नहीं की थी। मैं अब बिन्दा के रीएक्शन के इंतजार में था। रीना पास बैठ कर सिर नीचे करके सब सुन रही थी।
बिन्दा थोड़ा सोच कर बोली, “कह तो तुम ठीक रही हो बेटा, पर यहाँ घर पर…फ़िर रीना की छोटी बहनें भी तो हैं घर में….इसीलिए मैं सोच रही थी कि अगर रीना तुम लोग के साथ चली जाती और फ़िर उसके साथ वहीं यह सब होता तो…”।

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मुझे लगा कि ऐसा शानदार मौका हाथ से जा रहा है सो मैं अब बोला, “आप बेकार की बात सब सोच रही हो बिन्दा. मेरे हिसाब से रागिनी ठीक कह रही है, अगर रीना अपने घर पर अपने लोगों के बीच रहते हुए पहली बार यहीं चुद ले तो ज्यादा अच्छा होगा। अगर उसको बुरा लगा तो यहाँ आप तो हैं जिससे वह सब साफ़-साफ़ कह सकेगी, नहीं तो वहाँ जाने के बाद तो उसको बुरा लगे या अच्छा, उसको तो वहाँ चुदना हीं पड़ेगा।”

जब मैं यह सब कह रहा था तब तक रूबी और मीता भी वहीं आ गईं और इसी लिए जान बूझ कर मैंने चुदाई शब्द का प्रयोग अपने बात में किया था। रागिनी भी बोली, “हाँ मौसी अंकल बहुत सही बात कह रहे हैं, वहाँ जाने के बाद रीना की मर्जी तो खत्म हीं हो जाएगी। वैसे भी पिछले कई दिनों में रूबी और मीता को क्या समझ में नहीं आया होगा कि चौधरी और उसका मुंशी तेरे साथ रात रात भर कमरे में रह कर क्या करता है? एक एक आह की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है बाहर में. क्यों रीई रूबी और गीता, क्या तुम नहीं जानती कि रात में मैं या तेरी माँ अंकल से साथ क्यों सोते हैं ?

रूबी शर्मा गई और हाँ में सर ऊपर नीचे हिलाया.

मैं बोला, “मेरे ख्याल से तो रात से बेहतर होगा कि रीना अभी हीं नहाने से पहले आधा-एक घन्टा मेरे साथ कमरे में चली चले, चुदाई कर के उसके बाद नहा धो ले…उसको भी अच्छा लगेगा। रात में अगर चुदेगी तो फ़िर सारी रात वैसे हीं सोना होगा।”
बिन्दा के चेहरे से लग गया कि अब वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है और सब कुछ रागिनी पर छोड़ दी है।

बिन्दा ने अपनी छोटी बेटी तो हल्के से झिड़का, “तू यहाँ बैठ कर क्या सुन रही है सब बात…जाओ जा कर सब के लिए एक बार फ़िर चाय बनाओ।”
मीता जाना नहीं चाहती थी सो मुँह बिचकाते हुए उठ गई।
मैंने उसको छेड़ दिया, “अरे थोड़े हीं दिन की बात है, तुम्हारा भी समय आएगा बेबी… तब जी भर कर चुदवाना। अभी चाय बना कर लाओ।”
वो अब शर्माते हुए वहाँ से खिसक ली। चलो अच्छा है दो-दो कप चाय मुझे ठीक से जगा देगा। साँढ़ जब जगेगा तभी तो बछिया को गाय बनाएगा।”
मेरी इस बात पर रागिनी ने व्यंग्य किया, “साँड़…..ठीक है पर बुढ़्ढ़ा साँड़” और खिल्खिला कर हँस दी।
मैंभी कहाँ चुकने वाला था सो बोला, “अरे तुमको क्या पता….नया-नया जवान साँढ़ सब तो बछिया की नई बूर देख कर हीं टनटना जाता है और पेलने लगता है, मेरे जैसा बुढ़्ढ़ा साँढ़ हीं न बछिया को भी मजा देगा। बाछिया की नई-नवेली चूत को सुँघेगा, चुमेगा, चुसेगा, चाटेगा, चुभलाएगा….इतना बछिया को गरम करेगा कि चूत अपने हीं पानी से गीली हो जाएगी, तब जा कर इस साँढ़ का लन्ड टनटनाएगा….”

अब रूबी बोल पोड़ी, “छी छी, कितना गन्दा बोल रहे हैं आप…अब चुप रहिए।”  Chaar Ladkiyu Ki Chudai

मैंने उसके गाल सहला दिए और कहा, “अरे मेरी जान….यह सब तो घर पर बीवी को भी सुनना पड़ता है और तुम्हारी दीदी को तो रंडी बनने जाना हैं शहर। मैंने तो कुछ भी नहीं बोला है…..वहाँ तो लोग रंडी को कैसे पेलते हैं रागिनी से पूछो।”

रागिनी भी बोली, “हाँ मौसी, अब यह सब तो सुनने का आदत डालना होगा, और साथ में बोलना भी होगा”।

रीना का गाल लाल हुआ था, बोली, “मैं यह सब नहीं बोलुँगी…”।

मैंने उसकी चुची सहला दी वहीं सब के सामने, वो चौंक गई। मैं हँसते हुए बोला, “अभी चलो न भीतर एक बार जब लन्ड तुम्हारी बूर को चोदना शुरु करेगा तो अपने आप सब बोलने लगोगी, ऐसा बोलोगी कि तुम्हारे इस रूबी देवी जी का गाँड़ फ़ट जाएगा सब सुन कर।”

मीता अब चाय ले आई, तो मैंने कहा, “वैसे रूबी तुम भी चाहो तो चुदवा सकती हो…बच्ची तो अब मीता भी नहीं है। 14 साल की दो-तीन लड़की तो मैं हीं चोद चुका हूँ, और वो भी करीब-करीब इतने की हीं है।”

मीता सब सुन रही थी बोली, “अभी 14 नहीं पूरा हुआ है, करीब पाँच महीना बाकी है।”
मैं अब रंग में था, “ओए कोई बात नहीं एक बार जब झाँट हो गया तो फ़िर लड़की को चुदाने में कोई परेशानी नहीं होती। मैं तुम्हारे काँख में बाल देख चुका हूँ, सो झाँट तो पक्का निकल गया होगा अब तक तुम्हारी बूर पर…” मीता को लगा कि मैं उसकी बड़ाई कर रहा हूँ सो वो भी चट से बोली-“हाँ, हल्का-हल्का होने लगा है, पर दीदी सब की तरह नहीं है”। Chaar Ladkiyu Ki Chudai

बिन्दा ने उसको चुप रहने को कहा, तो मैंने उसको शह दी और कहा, “अरे बिन्दा जी, अब यह सब बोलने दीजिए। जितनी कम उमर में यह सब बोलना सीखेगी उतना हीं कम हिचक होगा वर्ना बड़ी हो जाने पर ऐसे बेशर्मों की तरह बोलना सीखना होता है। अभी देखा न रीना को, किस तरह बेलाग हो कर बोल दी कि मैं नहीं बोलुँगी ऐसे…।” सब हँसने लगे और रीना झेंप गई, तो मैंने कहा-“अभी चलो न बिस्तर पर रीना, उसके बाद तो तुम सब बोलोगी। ऐसा बेचैन करके रख दुँगा कि बार-बार चिल्ला कर कहना पड़ेगा मुझसे”।

 

उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मेरे तरह तिरछी नजर से देखते हुए पूछा-“क्या कहना पड़ेगा?”

मैंने उसको छेड़ा और लड़कियों की तरह आवाज पतली करके बोला, “आओ न, चोदो न मुझे….जल्दी से चोदो न मेरी चूत अपने लन्ड से”।

मेरे इस अभिनय पर सब लोग हँसने लगे। मैं अपने हाथ को लन्ड पर तौलिये के ऊपर से हीं फ़ेरने लगा था। लन्ड भी एक कुँआरी चूत की आस में ठनकना शुरु कर दिया था।मैंने वहीं सब के सामने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और उसकी आगे की चमड़ी पीछे करके लाल सुपाड़ा बहर निकाल कर उसको अपने अँगुठे से पोछा। मुझे पता था कि अब अगर मेरा अँगुठा सुँघा गया तो लन्ड की नशीली गन्ध से वस्ता होगा, सो मैंने अपने अँगुठे को रीना की नाक के पास ले गया-“सुँघ के देखो इसकी खुश्बू”।

मैं देख रहा था कि रागिनी के अलावे बाकी सब मेरे लन्ड को हीं देख रहे थे।

रीना हल्के से बिदकी-“छी: मैं नहीं सुँघुगी।”

मीता तड़ाक से बोली, “मुझे सुँघाईए न देखूँ कैसा महक है।” Chaar Ladkiyu Ki Chudai

मैंने अपना हाथ उसकी तरफ़ कर दिया, जबकि बिन्दा ने हँसते हुए मुझे लन्ड को ढ़्कने को कहा। मैं अब फ़िर से लन्ड को भीतर कर चुका था और मीता मेरे हाथ को सुँघी और बिना कुछ समझे बोली, “कहाँ कुछ खास लग रहा है…?”

अब रुबी भी बोली-“अरे सब ऐसे हीं बोल रहे हैं तुमको बेवकूफ़ बनाने के लिए और तू है कि बनते जा रही है।”

मैंने अब रूबी को लक्ष्य करके कहा, “सीधा लन्ड हीं सुँघना चाहोगी”।
वो जरा जानकार बनते हुए बोली-“आप, बस दीदी तक हीं रहिए….मेरी फ़िक्र मत कीजिए, मुझे इस सब बात में कोई दिल्चस्पी नहीं है।तड़ से बोली-“पर मुझे तो इसमें खुब दिलचस्पी है…।

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